श्री विष्णु खरे जी को "निर्लज्ज षड्यंत्रों'"मैचिंग बेशर्मी' जैसा प्रयोग
किसी भी कवि के संबंध में नहीं करना चाहिए। क्योंकि लीलाधर जगूड़ी, राजेश
जोशी, मंगलेश डबराल, वीरेन डंगवाल और अरुण कमल जैसे कवि केन्द्र साहित्य
अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत होने बिलकुल योग्य है। मेरा विचार यह है कि
चन्द्रकांत देवताले जैसे वरिष्ठ कवि को ज़रूर कुछ पहले ही यह पुरस्कार देना
चाहिए था। २००० में प्रकाशित इतनी पत्थर रोशनी और २००४ में प्रकाशित
उजाड़ में सग्रहालय जैसी रचनाएँ भी पुरस्कार योग्य कृतियाँ थीं।
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