श्री विष्णु खरे जी को "निर्लज्ज षड्यंत्रों'"मैचिंग बेशर्मी' जैसा प्रयोग
किसी भी कवि के संबंध में नहीं करना चाहिए। क्योंकि लीलाधर जगूड़ी, राजेश
जोशी, मंगलेश डबराल, वीरेन डंगवाल और अरुण कमल जैसे कवि केन्द्र साहित्य
अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत होने बिलकुल योग्य है। मेरा विचार यह है कि
चन्द्रकांत देवताले जैसे वरिष्ठ कवि को ज़रूर कुछ पहले ही यह पुरस्कार देना
चाहिए था। २००० में प्रकाशित इतनी पत्थर रोशनी और २००४ में प्रकाशित
उजाड़ में सग्रहालय जैसी रचनाएँ भी पुरस्कार योग्य कृतियाँ थीं।
अनीष चन्द्रकमल
Friday, 18 January 2013
Saturday, 5 January 2013
केरल की एक प्रिंसीपल अदालत ने उनतीस साल के
बलात्कारी राजेषकुमार फाँसी की सजा सुनाई गई हैं । मैं भी इस बात से
पूर्ण सहमत हूँ। वह जंरूर सज़ा के योग्य है। पर उनके परिवार के बारे में
तो हमें सोचना चाहिए। पत्नी, बच्चे और माँ उन्हीं के संरक्षण में हैं।
नया घर बनाने के लिए बैंक से पैसे लेने पर कर्ज भी बहुत चढा है। ऊँची
अदालत को फैसला करने के पहले इन्हीं निर्दोष लोगों के आगे की अबस्था के
बारे में भी ज़रूर सोचना चाहिए।
Monday, 22 October 2012
Monday, 24 September 2012
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